भुनी हुई अलसी खाने के फायदे | महिलाओं के लिए अलसी के फायदे | अलसी के बीज खाने का तरीका

Updated: 4 days ago



अनीस सीड्स को पतली सौप और विलायती सौप के नाम से भी जना जाता है और इसका बोटैनिकल नाम (PIMPINELLA अनिसम )भी है भुनी हुई अलसी खाने के फायदे महिलाओं के लिए बहुत लाभ दायक है




अलसी के पोषक तत्व क्या क्या है।


पिसी हुई 7 ग्राम अलसी में

  • 2.95 ग्रामफैट

  • 1.28 ग्रामप्रोटीन

  • 45.6 माइक्रोग्रामल्‍यूटिन

  • 44.9 मि.ग्राफास्‍फोरस

  • 27.4 मि.ग्रामैग्‍नीशियम

  • 2.02 ग्रामकार्बोहाइड्रेट

  • 1.91 ग्रामफाइबर

  • 17.8 मि.ग्राकैल्शियम

  • 56.9 मि.ग्रापोटैशियम

  • 6.09 माइक्रोग्रामफोलेट

  • जीएक्‍सेंथिन

होताहै।


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यह कहा पाई जाती है


ये भारत में उत्तर प्रदेश पंजाब उड़ीसा में उगाई जाती है। ये सॉफ का जो हम नॉर्मली प्रयोग में लेते है उसका रिलेटिव होता है.



अलसी के बीज खाने का तरीका


इस पतली सॉफ का प्रयोग गैस की प्रॉब्लम को दूर करने के लिए यूज़ किया जाता है. और इसका सेवन खांसी को दूर करने के लिए भी किया जाता है इसके अंदर ज्यादा तर एंटी-कॉलरा पाया जाता है इस लिए इसे गर्मियों में भी बहुत फायदे मंद मन जाता है. और कब्‍ज, डायबिटीज, हाईकोलेस्‍ट्रोल, हृदयरोग, कैंसर एवं कई अनेक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से बचने के लिए डायट्री सप्‍लीमेंट के रूप में अलसी का इस्‍ते माल किया जाने लगा है।


अलसी में कई लाभ पहुंचाने वाले अनेक गुण मौजूद होते हैं अलसी के बीज गोली, कैप्‍सूल, तेल, आटे के रूप में उपलब्‍ध है


अलसी खाने के लाभ


अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड और लिगनेन एंटीऑक्सीडेंट होता है और वैज्ञानिको के अनुसार इसमें कई प्रकार की कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने की छमता होती है। ये नई रक्त वाहिकाओं को बनने से रोक कर ट्यूमर के बढ़ने की गति की छमता को कम कर देता है।


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AHA के अनुसार (अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन) अधिक मात्रा में फाइबर और ओमेगा-3 का सेवन करने से ह्रदय का स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है। लिगनेन भी ह्रदय की परेशानियों से बचाता है। इसके अंदर फाइटोस्टेरोल

भी होता है जो की आंतों में कोलेस्ट्रोल को अवशोषित होने से बचता है।


AF (अर्थराइटिस फाउंडेशन) संस्था का कहना है की अलसी जोड़ों के दर्द और अकड़न को कम करने में भी मदद गार साबित हुआ है। और ज्यादा तर लोग तो इसको रुमेटाइड आर्थराइटिस, लुपस के लिए भी अलसी को खाते हैं।


अलसी में कई गुणों का पोषक तत्व मौजूद होता है और यह आयुर्वेदिक दवा बनाने में और पूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए बहुत उपयोगी है। ये त्वचा के PH स्तर को संतुलित रखने में बहुत मदद करता है, और ये डायबिटीज, एथेरोस्केलेरोसिस और आर्थराइटिस को रोकने एवं कैंसर जैसी कई बिमारिओ के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।


साल 2007 में researchers की टीम ने रिसर्च के परिणाम प्रस्तुत करते हुए कहा था कि अलसी महिलाओं में menopause के दौरान hot flashes की गंभीरता को कम करने में हेल्प कर सकती है।


अलसी में insoluble fiber भी हैं जो ज्यादा तर पानी में घुलते नहीं है और खाने के बाद पाचन मार्ग में ही रह जाते हैं। इस तरह यह पानी को सोख लेता है और कब्ज से राहत दिलाने में हेल्प करता हैं। अगर अलसी के खाने के बाद पानी कम पिया जाए तो कब्ज की स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है।


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