Pregnancy calculator | First-month stages of pregnancy: # best pregnancy test | hhindi

Updated: 2 days ago

Pregnancy का पहला महीना एक से लेकर चार हफ्ते तक का होता है। और ये आपकी गर्भवस्था का 1st Trimester होता है। गर्भवस्था किसी भी महिला के लिए वो समय होता है जो उसके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक होता है। First month stages of pregnancy के दौरान ज्यादा तर महिलाओ को तो ये पता ही नहीं चलता है की वो प्रेग्नेंट है। लेकिन अगर आप प्लानिंग के तहत Pregnancy प्लान करते है। तो आप शुरुआत से ही अपना ख्याल रख सकते है।



Pregnancy के पहले महीने की सारी जानकारी आज आपको इस पोस्ट में मिल जाएगी। तो आप इस आगे पड़ना जारी रखे।


Pregnancy confirmed होने का सबसे सटीक तरीका महिला की महामारी के miss होने से लगता है। जिसके बाद महिला घर पर ही Pregnancy kit की हेल्प से pregnancy Test करके इसके positive या negative result का पता लगा सकती है।


Pregnancy confirmed होते ही सलाह देने वालों का सिलसिला शुरु हो जाता है। कई बार तो महिलाओ को इतनी सलाह मिलने लगती है। की वो confused हो जाती है की कब उसे क्या क्या करना है और क्या नहीं। डॉक्टर pregnancy के पहले महीने की गड़ना आखिरी पीरियड के पहले दिन से करते है। इस लिए पहले के दो हफ्ते तो आपको गर्भाधान का पता ही नहीं चलेगा।


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अब इस पीरियड की मिस होने के Date से इसमें 9 महीने और 7 दिन जोड़ कर Doctor बच्चे की जन्म की तिथि बताते है। ज्यादा तर महिलाओ के शिशु का जन्म Delivery Date के थोड़ा पहली Date में या थोड़ा बाद की Date में होता है।


delivery date कैसे calculate करते है। इसके बारे में भी आपको जल्द ही एक पोस्ट देखने के मिल जायेगा।


गर्भावस्था के शुरुआती दिन बहुत ही ज्यादा नाजुक होते है। और अगर इस दौर में महिला बहुत ज्यादा अच्छे से ख्याल रखती है। तो होने वाला शुशु न तो premature पैदा होता है और न ही शारीरिक रूप से विकलांग।



गर्भावस्था के पहले महीने में महिलाओं में बहुत सारे बदलाव आते है pregnancy के पहले महीने में पीरियड का न आना इसका main लछड़ होता है। कुछ महिलाओ को गर्भधारण के कुछ घंटो में ही ये पता चल जाता है की वो प्रेगनेंट है। और कई महिलाओ को पीरियड्स न आने तक भी समझ में नहीं अ पता है।


ऐसा इसलिए क्यूंकि हर महिलाओ की बॉडी की बनावट और क्रियाए अलग अलग होती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओ को पहले महीने में थकावट रहने लगती है। महिलाओ का स्वाभाव बदलने लगता है। महिला को उलटी मॉर्निंग sickness मैथली और ऐठन होने लगती है।


भोजन करने की इच्छा या फिर भोजन करने की बिलकुल भी इक्छा न करना ये सब भी महिलाओ को शुरुआत में होता है। इसके साथ ही कब्ज कमर दर्द की शकायत सिर में दर्द और मुहं से गंद आना। चक्कर आना जी मचलाना और नींद न आने जैसे लक्छण भी दिखाई देने लगते है। ये सभी महिलाओ में hormones के बदलाब के कारण भी हो सकता है


वेस्ट का आकार तेजी से बढ़ने के साथ साथ वेस्ट में दर्द भी महसूस होने लगता है। हो सकता है की आपको अधिक लार आये और अधिक पेशाब आने को हो। और कमर के निचे के भाग में दर्द की शिकायत होने लगे। तो ये सभी भी hormones में बद्लाभ के कारण होता है।


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अब आप को अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देना चाहिए टाइट कपडे पहनने से खास तौर पर बचाना चाहिए। और हाई हील्स का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। लगभग इस समय पर या फिर आपकी महामारी की तारिक के समय पर आपको हल्का रक्त स्त्राव या spotting भी हो सकती है। इसे breakthrough bleeding कहा जाता है। ये तब होता है जब महामारी चक्र के लिए जिम्मेदार hormones रक्त स्त्राव प्रेरित करते है। पूरी गर्भावस्था के दौरान ऐसा एक या इससे ज्यादा बार हो सकता है। मगर आम तोर पर इससे चिंता की कोई बात नहीं होती है।


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अब हम बात करते है पहले महीने में शिशु का क्या क्या विकास होता है।


जैसे जैसे फर्टिलाइजेशन यानि की निषेचन होता है तो अंडा कई कोशिकाओं में विभाजित होता जाता है। इसके बाद गर्भाशय में विभाजित कोशिकाओं के बाद एक भ्रूण का रूप ले लेते है। शरीर में अल्प विकसित नाल और गर्भ नाल जो बच्चे को पोषण और ऑक्सीजन देने का कार्य करती है। वो शरीर में एक्टिव हो जाते है। ये कोशिकाएं तीन परतो में विभाजित हो जाती है।


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जो की आगे चलकर आपके शिशु के अंग और ऊतक बनते है। इसमें सबसे बाहरी लेयर यानि की परत में आगे निरल tube नामक एक खोखली सरचना रूप ले लेती है। यही वो जगह होती है यहाँ पर आपके शिशु का मस्तिष्क, रीड की हड्डी, मेरूरज्जा, और नसे, विकसित होती है। त्वचा बाल और नाख़ून भी इसी परत से विकसित होते है। बीच की परत में आगे चलकर असिपंजर यानि की हड्डिया और मासपेशियों का विकाश होता है। और यही शिशु का दिल और रक्त संचरण तंत्र भी बनता है।



सबसे भीतरी परत में फेफड़े आंतो और मूत्र प्रणाली का भी विकाश की शुरुआत होती है। चार सफ्ता के गर्भावस्था होने तक आपके गर्भ में कोशिकाओ का गोलाकार गुच्छा भ्रूण जिसे embryo भी कहते है रूप में विकसित हो चूका होता है।


और इस समय इस भ्रूण का आकर खस खस के बीज जितना बड़ा होता है। और उसकी लम्बाई 0.1 cm यानि की 0.04 इंच होती है। और उसका बजन एक ग्राम से भी काम होता है। भ्रूण के चारो तरफ Amniotic थैली होती है जो लिक्विड से भरी होती है। ये गर्भस्त शुशु का बचाव करती है। अपरा जिसे की placenta भी कहते है। इसका विकास भी शुरुआती चरण में होता है। और तब ये आपके शिशु तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषण तत्व पहुँचते है।


बच्चे का विकाश गर्वधारण के दिन से ही शुरू हो जाता है। इसके बाद शुरुआती चार हफ्तों में ही भ्रूण की रचना होती है। तीसरे और चौथे सफ्ता के बीच विकाश शील हिरदय धड़कना शुरू हो जाता है। बाजु पैर फेफड़े बनाना शुरू हो जाते है। साथ ही आंख नाक कान और मुहं सहित चेहरे की रचना होना भी शुरू हो जाती है।


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इस पहले महा महिला के आहार या खान पान की बात करे तो इस दौरान खाने पिने का बहुत खास ख्याल रखना चाहिए। सुबह सुबह पानी पीने के बाद बहुत लाइट साइज स्नैक करे। जिसमे आप बस्किट या फिर ब्रेड का सेवन कर सकती है। इसमें आपको उल्टी होने के आकांशा कम होती है। गर्भावस्था के दौरान खूब सारा पानी पीना चाहिए।


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पपीता चीकू और अन्नास फलो का सेवन बिलकुल भी न करे। अगर आप ड्रिंक या स्मोकिंग करती है तो इसे तुरंत रोक दे। आप अपनी डायट में विटामिन आयरन और केल्सियम युक्त खुराक सबसे पहले ज्यादा ले। बहुत सारा खाना एक साथ खाने की वजह इस दौरान थोड़ा थोड़ा खाना कुछ कुछ घंटो में खाना चाहिए।


अपनी डायट में विटामिन युक्त खाना शामिल करे और इस दौरान fatty और मसाले दार भोजन से बचना चाहिए। लगा तार काफी देर तक आपको एक ही जगह पर खड़ा नहीं होना है। और या फिर एक ही जगह पर काफी देर तक नहीं बैठना है। इन दिनों में बहुत ही ज्यादा जरुली है की आप अपनी डायट में folic acid को भी शामिल करे। चाहे फ़ूड के रूप में ले या गोली के रूप में। ये आपके शुशु को न्यूरल ट्यूब दोषों जैसे की Spina Bifida जिसे की दरार युक्त रेडविक कहा जाता है इससे बचता है।



आपको बारहा सफ्ता की गर्भावस्ता तक प्रति दिन folic acid का स्तेमाल जरूल करना चाहिए। डॉक्टर की सलहा पर शुरुआती दिनों से ही आयरन की कमी से बचने के लिए आपको आयरन की गोलिया जरूल लेनी चाहिए। डायबटीज़ न हो तो आपको डायट में फलो के जूस को शामिल करिये। और रोजाना नारियल पानी जरूल पिए। जितना संभव हो उतना तजि हवा में टहले तजि हवा में रहे और भीड़ वाले, प्रदूषण वाली जगह पर न जाये। और कही भी सफर इस महा के दौरान न करे।


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